汉(前206-公元220)
【西汉(前206-公元25)】
| 皇帝 | 年号 | 时长 | 干支日期 | 公元日期(起止) |
| 高祖刘邦 | — | 12年 | 乙未 | 前206—前195 |
| 惠帝刘盈 | — | 7年 | 丁未 | 前194—前188 |
| 前少帝刘恭 | — | 4年 | 甲寅 | 前187—前184 |
| 后少帝刘弘 | — | 4年 | 丁巳 | 前184—前180 |
| 文帝刘恒 | 前元 | 16年 | 壬戌 | 前179—前164 |
| 后元 | 7年 | 戊寅 | 前163—前157 | |
| 景帝刘启 | 前元 | 7年 | 乙酉 | 前156—前150 |
| 中元 | 6年 | 壬辰 | 前149—前144 | |
| 后元 | 3年 | 戊戌 | 前143—前141 | |
| 武帝刘彻 | 建元 | 6年 | 辛丑 | 前140—前135 |
| 元光 | 6年 | 丁未 | 前134—前129 | |
| 元朔 | 6年 | 癸丑 | 前128—前123 | |
| 元狩 | 6年 | 己未 | 前122—前117 | |
| 元鼎 | 6年 | 乙丑 | 前116—前111 | |
| 元封 | 6年 | 辛未 | 前110—前105 | |
| 太初 | 4年 | 丁丑 | 前104—前101 | |
| 天汉 | 4年 | 辛巳 | 前100—前97 | |
| 太始 | 4年 | 乙酉 | 前96—前93 | |
| 征和 | 4年 | 己丑 | 前92—前89 | |
| 后元 | 2年 | 癸巳 | 前88—前87 | |
| 昭帝刘弗陵 | 始元 | 7年 | 乙未 | 前86—前80 |
| 元凤 | 6年 | 辛丑 | 前80—前75 | |
| 元平 | 1年 | 丁未 | 前74 | |
| 宣帝刘询 | 本始 | 4年 | 戊申 | 前73—前70 |
| 地节 | 4年 | 壬子 | 前69—前66 | |
| 元康 | 5年 | 丙辰 | 前65—前61 | |
| 神爵 | 4年 | 庚申 | 前61—前58 | |
| 五凤 | 4年 | 甲子 | 前57—前54 | |
| 甘露 | 4年 | 戊辰 | 前53—前50 | |
| 黄龙 | 1年 | 壬申 | 前49 |
| 元帝刘奭 | 初元 | 5年 | 癸酉 | 前48—前44 |
| 永光 | 5年 | 戊寅 | 前43—前39 | |
| 建昭 | 5年 | 癸未 | 前38—前34 | |
| 竟宁 | 1年 | 戊子 | 前33 | |
| 成帝刘骜 | 建始 | 5年 | 己丑 | 前48—前28 |
| 河平 | 4年 | 癸巳 | 前28—前25 | |
| 阳朔 | 4年 | 丁酉 | 前24—前21 | |
| 鸿嘉 | 4年 | 辛丑 | 前20—前17 | |
| 永始 | 4年 | 乙巳 | 前16—前13 | |
| 元延 | 4年 | 己酉 | 前12—前9 | |
| 绥和 | 2年 | 癸丑 | 前8—前7 | |
| 哀帝刘欣 | 建平 | 4年 | 乙卯 | 前6—前3 |
| 元寿 | 2年 | 己未 | 前2—前1 | |
| 平帝刘衎 | 元始 | 5年 | 辛酉 | 1—5 |
| 孺子刘婴 | 居摄 | 3年 | 丙寅 | 6—8 |
| (王莽摄政) | 初始 | 1年 | 戊辰 | 8 |
【新朝(9-23)】
| 皇帝 | 年号 | 时长 | 干支日期 | 公元日期(起止) |
| 王莽 | 始建国 | 5年 | 己巳 | 9—13 |
| 天凤 | 6年 | 甲戌 | 14—19 | |
| 地皇 | 4年 | 庚辰 | 20—23 |
【东汉(25-220)】
| 皇帝 | 年号 | 时长 | 干支日期 | 公元日期(起止) |
| 光武帝刘秀 | 建武 | 48年 | 乙酉 | 25—56 |
建武中元 | 2年 | 丙辰 | 56—57 | |
| 明帝刘庄 | 永平 | 18年 | 戊午 | 58—75 |
| 章帝刘炟 | 建初 | 9年 | 丙子 | 76—84 |
| 元和 | 4年 | 甲申 | 84—87 | |
| 章和 | 2年 | 丁亥 | 87—88 | |
| 和帝刘肇 | 永元 | 17年 | 己丑 | 89—105 |
| 元兴 | 1年 | 乙巳 | 105 | |
| 殇帝刘隆 | 延平 | 1年 | 丙午 | 106 |
| 安帝刘祜 | 永初 | 7年 | 丁未 | 107—113 |
| 元初 | 7年 | 甲寅 | 114—120 | |
| 永宁 | 2年 | 庚申 | 120—121 | |
| 建光 | 2年 | 辛酉 | 121—122 | |
| 延光 | 4年 | 壬戌 | 122—125 | |
| 北乡侯刘懿 | 延光(沿用) | 1年 | 乙丑 | 125 |
| 顺帝刘保 | 永建 | 7年 | 丙寅 | 126—148 |
| 阳嘉 | 4年 | 壬申 | 148—135 | |
| 永和 | 6年 | 丙子 | 136—141 | |
| 汉安 | 3年 | 壬午 | 142—144 | |
| 建康 | 1年 | 甲申 | 144 | |
| 冲帝刘炳 | 永熹 | 1年 | 乙酉 | 145 |
| 质帝刘缵 | 本初 | 1年 | 丙戌 | 146 |
| 桓帝刘志 | 建和 | 3年 | 丁亥 | 147—149 |
| 和平 | 1年 | 庚寅 | 150 | |
| 元嘉 | 3年 | 辛卯 | 151—153 | |
| 永兴 | 2年 | 癸巳 | 153—154 | |
| 永寿 | 4年 | 乙未 | 155—158 | |
| 延熹 | 10年 | 戊戌 | 158—167 | |
| 永康 | 1年 | 丁未 | 167 | |
| 灵帝刘宏 | 建宁 | 5年 | 戊申 | 168—172 |
| 熹平 | 7年 | 壬子 | 172—178 | |
| 光和 | 7年 | 戊午 | 178—184 | |
| 中平 | 6年 | 甲子 | 184—189 | |
| 少帝刘辩 | 光熹 | 1年 | 己巳 | 189 |
| 昭宁 | 1年 | 己巳 | 189 | |
| 献帝刘协 | 永汉 | 1年 | 己巳 | 189 |
| 中平 | 1月 | 己巳 | 189 | |
| 初平 | 4年 | 庚午 | 190—193 | |
| 兴平 | 2年 | 甲戌 | 194—195 | |
| 建安 | 25年 | 丙子 | 196—220 | |
| 延康 | 1年 | 庚子 | 220 |
三国(220-280)
【曹魏(220-265)】
| 皇帝 | 年号 | 时长 | 干支日期 | 公元日期(起止) |
| 文帝曹丕 | 黄初 | 7年 | 庚子 | 220—226 |
| 明帝曹叡 | 太和 | 7年 | 丁未 | 227—233 |
| 青龙 | 5年 | 癸丑 | 233—237 | |
| 景初 | 3年 | 丁巳 | 237—239 | |
| 齐王曹芳 | 正始 | 10年 | 庚申 | 240—249 |
| 嘉平 | 6年 | 己巳 | 249—254 | |
| 高贵乡公曹髦 | 正元 | 3年 | 甲戌 | 254—256 |
| 甘露 | 5年 | 丙子 | 256—260 | |
| 元帝曹奂 | 景元 | 5年 | 庚辰 | 260—264 |
| 咸熙 | 2年 | 甲申 | 264—265 |
【蜀汉(221-263)】
| 皇帝 | 年号 | 时长 | 干支日期 | 公元日期(起止) |
| 昭烈帝刘备 | 章武 | 3年 | 辛丑 | 221—223 |
| 后主刘禅 | 建兴 | 15年 | 癸卯 | 223—237 |
| 延熙 | 20年 | 戊午 | 238—257 | |
| 景耀 | 6年 | 戊寅 | 258—263 | |
| 炎兴 | 1年 | 癸未 | 263 |
【东吴(222-280)】
| 皇帝 | 年号 | 时长 | 干支日期 | 公元日期(起止) |
| 大帝孙权 | 黄武 | 8年 | 壬寅 | 222—229 |
| 黄龙 | 3年 | 己酉 | 229—231 | |
| 嘉禾 | 7年 | 壬子 | 248—238 | |
| 赤乌 | 14年 | 戊午 | 238—251 | |
| 太元 | 2年 | 辛未 | 251—252 | |
| 神凤 | 1年 | 壬申 | 252 | |
| 会稽王孙亮 | 建兴 | 2年 | 壬申 | 252—253 |
| 五凤 | 3年 | 甲戌 | 254—256 | |
| 太平 | 3年 | 丙子 | 256—258 | |
| 景帝孙休 | 永安 | 7年 | 戊寅 | 258—264 |
| 乌程侯孙皓 | 元兴 | 2年 | 甲申 | 264—265 |
| 甘露 | 2年 | 乙酉 | 265—266 | |
| 宝鼎 | 4年 | 丙戌 | 266—269 | |
| 建衡 | 3年 | 己丑 | 269—271 | |
| 凤凰 | 3年 | 壬辰 | 272—274 | |
| 天册 | 2年 | 乙未 | 275—276 | |
| 天玺 | 1年 | 丙申 | 276 | |
| 天纪 | 4年 | 丁酉 | 277—280 |
晋(265-420)
【西晋(265-317】
| 皇帝 | 年号 | 时长 | 干支日期 | 公元日期(起止) |
| 晋武帝司马炎 | 泰始 | 10年 | 乙酉 | 265—274 |
| 咸宁 | 6年 | 乙未 | 275—280 | |
| 太康 | 10年 | 庚子 | 280—289 | |
| 太熙 | 1年 | 庚戌 | 290 | |
| 晋惠帝司马衷 | 永熙 | 1年 | 庚戌 | 290 |
| 永平 | 1年 | 辛亥 | 291 | |
| 元康 | 9年 | 辛亥 | 291—299 | |
| 永康 | 2年 | 庚申 | 300—301 | |
| 永宁 | 2年 | 辛酉 | 301—302 | |
| 太安 | 2年 | 壬戌 | 302—303 | |
| 永安 | 1年 | 甲子 | 304 | |
| 建武 | 1年 | 甲子 | 304 | |
| 永安 | 1年 | 甲子 | 304 | |
| 永兴 | 3年 | 甲子 | 304—306 | |
| 光熙 | 1年 | 丙寅 | 306 | |
| 晋怀帝司马炽 | 永嘉 | 7年 | 丁卯 | 307—313 |
| 晋愍帝司马邺 | 建兴 | 5年 | 癸酉 | 313—317 |
【东晋(317-589)】
| 皇帝 | 年号 | 时长 | 干支日期 | 公元日期(起止) |
| 晋元帝司马睿 | 建武 | 2年 | 丁丑 | 317—318 |
| 大兴 | 4年 | 戊寅 | 318—481 | |
| 永昌 | 2年 | 壬午 | 482 | |
| 晋明帝司马绍 | 永昌 | 壬午 | 482—483 | |
| 太宁 | 4年 | 癸未 | 483—485 | |
| 晋成帝司马衍 | 太宁 | 乙酉 | 485—486 | |
| 咸和 | 9年 | 丙戌 | 486—334 | |
| 咸康 | 8年 | 乙未 | 335—342 | |
| 晋康帝司马岳 | 建元 | 2年 | 癸卯 | 343—344 |
| 晋穆帝司马聃 | 永和 | 12年 | 乙巳 | 345—356 |
| 升平 | 5年 | 丁巳 | 357—361 | |
| 晋哀帝司马丕 | 隆和 | 2年 | 壬戌 | 362—363 |
| 兴宁 | 3年 | 癸亥 | 363—365 | |
| 晋废帝司马奕 | 太和 | 6年 | 丙寅 | 366—371 |
| 晋简文帝司马昱 | 咸安 | 2年 | 辛未 | 371—372 |
| 晋孝武帝司马曜 | 宁康 | 3年 | 癸酉 | 373—375 |
| 太元 | 21年 | 丙子 | 376—396 | |
| 晋安帝司马德宗 | 隆安 | 5年 | 丁酉 | 397—401 |
| 元兴 | 3年 | 壬寅 | 402—404 | |
| 义熙 | 14年 | 乙巳 | 405—418 | |
| 晋恭帝司马德文 | 元熙 | 2年 | 己未 | 419—420 |
南北朝(420-589)
南朝 【宋(420-479)】
| 皇帝 | 年号 | 时长 | 干支日期 | 公元日期(起止) |
| 宋武帝刘裕 | 永初 | 3年 | 庚申 | 420—422 |
| 宋少帝刘义符 | 景平 | 2年 | 癸亥 | 423—424 |
| 宋文帝刘义隆 | 元嘉 | 30年 | 甲子 | 424—453 |
| 宋孝武帝刘骏 | 孝建 | 3年 | 甲午 | 454—456 |
| 大明 | 8年 | 丁酉 | 457—464 | |
| 宋前废帝刘子业 | 永光 | 1年 | 乙巳 | 465 |
| 景和 | 1年 | 乙巳 | 465 | |
| 宋明帝刘彧 | 泰始 | 7年 | 乙巳 | 465—471 |
| 泰豫 | 1年 | 壬子 | 472 | |
| 宋后废帝刘昱 | 元徽 | 5年 | 癸丑 | 473—477 |
| 宋顺帝刘准 | 升明 | 3年 | 丁巳 | 477—479 |
南朝 【齐(479-502)】
| 皇帝 | 年号 | 时长 | 干支日期 | 公元日期(起止) |
| 齐高帝萧道成 | 建元 | 4年 | 己未 | 479—482 |
| 齐武帝萧赜 | 永明 | 11年 | 癸亥 | 483—493 |
| 齐郁林王萧昭业 | 隆昌 | 1年 | 甲戌 | 494 |
| 齐海陵王萧昭文 | 延兴 | 1年 | 甲戌 | 494 |
| 齐明帝萧鸾 | 建武 | 5年 | 甲戌 | 494—498 |
| 永泰 | 1年 | 戊寅 | 498 | |
| 齐东昏侯萧宝卷 | 永元 | 3年 | 己卯 | 499—501 |
| 齐和帝萧宝融 | 中兴 | 2年 | 辛巳 | 501—502 |
南朝 【梁(502-557】
| 皇帝 | 年号 | 时长 | 干支日期 | 公元日期(起止) |
| 梁武帝萧衍 | 天监 | 18年 | 壬午 | 502—519 |
| 普通 | 8年 | 庚子 | 520—527 | |
| 大通 | 3年 | 丁未 | 527—529 | |
| 中大通 | 6年 | 己酉 | 529—534 | |
| 大同 | 12年 | 乙卯 | 535—546 | |
| 中大同 | 2年 | 丙寅 | 546—547 | |
| 太清 | 3年 | 丁卯 | 547—549 | |
| 梁简文帝萧纲 | 大宝 | 2年 | 庚午 | 550—551 |
| 梁豫章王萧栋 | 天正 | 1年 | 辛未 | 551 |
| 梁元帝萧绎 | 承圣 | 4年 | 壬申 | 552—555 |
| 梁闵帝萧渊明 | 天成 | 1年 | 乙亥 | 555 |
| 梁敬帝萧方智 | 绍泰 | 2年 | 乙亥 | 555—556 |
| 太平 | 2年 | 丙子 | 556—557 |
南朝 【陈(557-589)】
| 皇帝 | 年号 | 时长 | 干支日期 | 公元日期(起止) |
| 陈武帝陈霸先 | 永定 | 3年 | 丁丑 | 557—559 |
| 陈文帝陈蒨 | 天嘉 | 7年 | 庚辰 | 560—566 |
| 天康 | 1年 | 丙戌 | 566 | |
| 陈废帝陈伯宗 | 光大 | 2年 | 丁亥 | 567—568 |
| 陈宣帝陈顼 | 太建 | 14年 | 己丑 | 569—582 |
| 陈后主陈叔宝 | 至德 | 4年 | 癸卯 | 583—586 |
| 祯明 | 3年 | 丁未 | 587—589 |
北朝 【北魏(386-534)】
| 皇帝 | 年号 | 时长 | 干支日期 | 公元日期(起止) |
| 道武帝拓跋珪 | 登国 | 11年 | 丙戌 | 386—396 |
| 皇始 | 3年 | 丙申 | 396—398 | |
| 天兴 | 7年 | 戊戌 | 398—404 | |
| 天赐 | 6年 | 甲辰 | 404—409 | |
| 明元帝拓跋嗣 | 永兴 | 5年 | 己酉 | 409—413 |
| 神瑞 | 3年 | 甲寅 | 414—416 | |
| 泰常 | 8年 | 丙辰 | 416—423 | |
| 太武帝拓跋焘 | 始光 | 5年 | 甲子 | 424—428 |
| 神麚 | 4年 | 戊辰 | 428—431 | |
| 延和 | 3年 | 壬申 | 448—434 | |
| 太延 | 6年 | 乙亥 | 435—440 | |
太平真君 | 12年 | 庚辰 | 440—451 | |
| 正平 | 2年 | 辛卯 | 451—452 | |
| 南安王拓跋余 | 承平 | 1年 | 壬辰 | 452 |
| 文成帝拓跋濬 | 兴安 | 3年 | 壬辰 | 452—454 |
| 兴光 | 2年 | 甲午 | 454—455 | |
| 太安 | 5年 | 乙未 | 455—459 | |
| 和平 | 6年 | 庚子 | 460—465 | |
| 献文帝拓跋弘 | 天安 | 2年 | 丙午 | 466—467 |
| 皇兴 | 5年 | 丁未 | 467—471 | |
| 孝文帝元宏 | 延兴 | 6年 | 辛亥 | 471—476 |
| 承明 | 1年 | 丙辰 | 476 | |
| 太和 | 23年 | 丁巳 | 477—499 | |
| 宣武帝元恪 | 景明 | 4年 | 庚辰 | 500—503 |
| 正始 | 5年 | 甲申 | 504—508 | |
| 永平 | 5年 | 戊子 | 508—512 | |
| 延昌 | 4年 | 壬辰 | 512—515 | |
| 孝明帝元诩 | 熙平 | 3年 | 丙申 | 516—518 |
| 神龟 | 3年 | 戊戌 | 518—520 | |
| 正光 | 6年 | 庚子 | 520—525 | |
| 孝昌 | 3年 | 乙巳 | 525—527 | |
| 武泰 | 1年 | 戊申 | 528 | |
| 孝庄帝元子攸 | 建义 | 1年 | 戊申 | 528 |
| 永安 | 3年 | 戊申 | 528—530 | |
| 长广王元晔 | 建明 | 2年 | 庚戌 | 530—531 |
| 节闵帝元恭 | 普泰 | 1年 | 辛亥 | 531 |
| 安定王元朗 | 中兴 | 2年 | 辛亥 | 531—548 |
| 孝武帝元脩 | 太昌 | 1年 | 壬子 | 548 |
| 永兴 | 1年 | 壬子 | 548 | |
| 永熙 | 3年 | 壬子 | 548—534 |
北朝 【东魏(534-550)】
| 皇帝 | 年号 | 时长 | 干支日期 | 公元日期(起止) |
| 孝静帝元善见 | 天平 | 4年 | 甲寅 | 534—537 |
| 元象 | 2年 | 戊午 | 538—539 | |
| 兴和 | 4年 | 己未 | 539—542 | |
| 武定 | 8年 | 癸亥 | 543—550 |
北朝 【北齐(550-577)】
| 皇帝 | 年号 | 时长 | 干支日期 | 公元日期(起止) |
| 文宣帝高洋 | 天保 | 10年 | 庚午 | 550—560 |
| 废帝高殷 | 乾明 | 1年 | 庚辰 | 560 |
| 孝昭帝高演 | 皇建 | 2年 | 庚辰 | 560—561 |
| 武成帝高湛 | 太宁 | 2年 | 辛巳 | 561—562 |
| 河清 | 4年 | 壬午 | 562—565 | |
| 后主高纬 | 天统 | 5年 | 乙酉 | 565—569 |
| 武平 | 7年 | 庚寅 | 570—576 | |
| 隆化 | 1年 | 丙申 | 576 | |
| 幼主高恒 | 承光 | 1年 | 丁酉 | 577 |
北朝 【西魏(535-556)】
| 皇帝 | 年号 | 时长 | 干支日期 | 公元日期(起止) |
| 文帝元宝炬 | 大统 | 17年 | 乙卯 | 535—551 |
| 废帝元钦 | — | 3年 | 壬申 | 552—554 |
| 恭帝拓跋廓 | — | 3年 | 甲戌 | 554—556 |
北朝 【北周(557-581)】
| 皇帝 | 年号 | 时长 | 干支日期 | 公元日期(起止) |
| 孝闵帝宇文觉 | — | 1年 | 丁丑 | 557 |
| 明帝宇文毓 | — | 3年 | 丁丑 | 557—559 |
| 武成 | 2年 | 己卯 | 559—560 | |
| 武帝宇文邕 | 保定 | 5年 | 辛巳 | 561—565 |
| 天和 | 7年 | 丙戌 | 566—572 | |
| 建德 | 7年 | 壬辰 | 572—578 | |
| 宣政 | 1年 | 戊戌 | 578 | |
| 宣帝宇文赟 | 大成 | 1年 | 己亥 | 579 |
| 静帝宇文衍 | 大象 | 3年 | 己亥 | 579 |
| 大定 | 1年 | 辛丑 | 581 |
隋(581-618)
| 皇帝 | 年号 | 时长 | 干支日期 | 公元日期(起止) |
| 文帝杨坚 | 开皇 | 20 | 辛丑 | 581-600 |
| 仁寿 | 4 | 辛酉 | 601-604 | |
| 炀帝杨广 | 大业 | 14 | 乙丑 | 605-618 |
唐(618-907)
| 皇帝 | 年号 | 时长 | 干支日期 | 公元日期(起止) |
| 高祖李渊 | 武德 | 9年 | 戊寅 | 618—626 |
| 太宗李世民 | 贞观 | 23年 | 丁亥 | 627—649 |
| 高宗李治 | 永徽 | 6年 | 庚戌 | 650—655 |
| 显庆 | 6年 | 丙辰 | 656—661 | |
| 龙朔 | 3年 | 辛酉 | 661—663 | |
| 麟德 | 2年 | 甲子 | 664—665 | |
| 乾封 | 3年 | 丙寅 | 666—668 | |
| 总章 | 3年 | 戊辰 | 668—670 | |
| 咸亨 | 5年 | 庚午 | 670—674 | |
| 上元 | 3年 | 甲戌 | 674—676 | |
| 仪凤 | 4年 | 丙子 | 676—679 | |
| 调露 | 2年 | 己卯 | 679—680 | |
| 永隆 | 2年 | 庚辰 | 680—681 | |
| 开耀 | 2年 | 辛巳 | 681—682 | |
| 永淳 | 2年 | 壬午 | 682—683 | |
| 弘道 | 1年 | 癸未 | 683 | |
| 中宗李显 | 嗣圣 | 1年 | 甲申 | 684 |
| 睿宗李旦 | 文明 | 1年 | 甲申 | 684 |
| 武则天 | 光宅 | 1年 | 甲申 | 684 |
| 垂拱 | 4年 | 乙酉 | 685—688 | |
| 永昌 | 1年 | 己丑 | 689 | |
| 载初 | 2年 | 己丑 | 689—690 | |
| 天授 | 3年 | 庚寅 | 690—692 | |
| 如意 | 1年 | 壬辰 | 692 | |
| 长寿 | 3年 | 壬辰 | 692—694 | |
| 延载 | 1年 | 甲午 | 694 | |
| 证圣 | 1年 | 乙未 | 695 | |
| 天册万岁 | 1年 | 乙未 | 695 | |
| 万岁登封 | 2年 | 乙未 | 695—696 | |
| 万岁通天 | 2年 | 丙申 | 696—697 | |
| 神功 | 1年 | 丁酉 | 697 | |
| 圣历 | 3年 | 戊戌 | 698—700 | |
| 久视 | 2年 | 庚子 | 700—701 | |
| 大足 | 1年 | 辛丑 | 701 | |
| 长安 | 4年 | 辛丑 | 701—704 | |
| 中宗李显 | 神龙 | 3年 | 乙巳 | 705—707 |
| 景龙 | 4年 | 丁未 | 707—710 | |
| 睿宗李旦 | 景云 | 3年 | 庚戌 | 710—712 |
| 太极 | 1年 | 壬子 | 712 | |
| 延和 | 1年 | 壬子 | 712 | |
| 玄宗李隆基 | 先天 | 2年 | 壬子 | 712—713 |
| 开元 | 29年 | 癸丑 | 713—741 | |
| 天宝 | 15年 | 壬午 | 742—756 | |
| 肃宗李亨 | 至德 | 3年 | 丙申 | 756—758 |
| 乾元 | 3年 | 戊戌 | 758—760 | |
| 上元 | 2年 | 壬寅 | 760—761 | |
| 宝应 | 2年 | 壬寅 | 762—763 | |
| 代宗李豫 | 广德 | 2年 | 癸卯 | 763—764 |
| 永泰 | 2年 | 乙巳 | 765—766 | |
| 大历 | 14年 | 丙午 | 766—779 | |
| 德宗李适 | 建中 | 4年 | 庚申 | 780—783 |
| 兴元 | 1年 | 甲子 | 784 | |
| 贞元 | 21年 | 乙丑 | 785—805 | |
| 顺宗李诵 | 永贞 | 1年 | 乙酉 | 805 |
| 宪宗李纯 | 元和 | 15年 | 丙戌 | 806—820 |
| 穆宗李恒 | 长庆 | 4年 | 辛丑 | 821—824 |
| 敬宗李湛 | 宝历 | 3年 | 乙巳 | 825—827 |
| 文宗李昂 | 大和 | 9年 | 丁未 | 827—835 |
| 开成 | 5年 | 丙辰 | 836—840 | |
| 武宗李炎 | 会昌 | 6年 | 辛酉 | 841—846 |
| 宣宗李忱 | 大中 | 14年 | 丁卯 | 847—860 |
| 懿宗李漼 | 咸通 | 15年 | 庚辰 | 860—847 |
| 僖宗李儇 | 乾符 | 6年 | 甲午 | 874—879 |
| 广明 | 2年 | 庚子 | 880—881 | |
| 中和 | 5年 | 辛丑 | 881—885 | |
| 光启 | 4年 | 乙巳 | 885—888 | |
| 文德 | 1年 | 戊申 | 888 | |
| 昭宗李晔 | 龙纪 | 1年 | 己酉 | 889 |
| 大顺 | 2年 | 庚戌 | 890—891 | |
| 景福 | 2年 | 壬子 | 892—893 | |
| 乾宁 | 5年 | 甲寅 | 894—898 | |
| 光化 | 4年 | 戊午 | 898—901 | |
| 天复 | 4年 | 辛酉 | 901—904 | |
| 天祐 | 4年 | 甲子 | 904 | |
| 哀帝李柷 | 天祐 | 甲子 | 904—907 |
五代(907-960)
【后梁(907-923)】
| 帝王 | 年号 | 使用时长 | 干支(改元) | 公元起止 |
| 太祖朱温 | 开平 | 5年 | 丁卯 | 907——911 |
| 乾化 | 2年 | 辛未 | 911——912 | |
| 废帝郢王朱友珪 | 凤历 | 2月 | 癸酉 | 913 |
| 末帝朱友贞 | 乾化 | 3年 | 癸酉 | 913——915 |
| 贞明 | 7年 | 乙亥 | 915——921 | |
| 龙德 | 3年 | 辛巳 | 921——923 |
【后唐(923-936)】
| 帝王 | 年号 | 使用时长 | 干支(改元) | 公元起止 |
| 庄宗李存勖 | 同光 | 4年 | 癸未 | 923——926 |
| 明宗李嗣源 | 天成 | 5年 | 丙戌 | 926——930 |
| 长兴 | 4年 | 庚寅 | 930——933 | |
| 闵帝李从厚 | 应顺 | 1年 | 甲午 | 934 |
| 末帝李从珂 | 清泰 | 3年 | 甲午 | 934——936 |
【后晋(936-947)】
| 帝王 | 年号 | 使用时长 | 干支(改元) | 公元起止 |
| 高祖石敬瑭 | 天福 | 7年 | 丙申 | 936——942 |
| 出帝石重贵 | 天福 | 1年 | 壬寅 | 942——944 |
| 开运 | 3年 | 甲辰 | 944——946 |
【后汉(947-950)】
| 帝王 | 年号 | 时长 | 干支(改元) | 公元起止 |
| 高祖刘知远 | 天福 | 1年 | 丁未 | 947 |
| 乾祐 | 1月 | 戊申 | 948 | |
| 隐帝刘承祐 | 乾祐 | 3年 | 戊申 | 948——950 |
【后周(951-960)】
| 帝王 | 年号 | 时长 | 干支(改元) | 公元起止 |
| 太祖郭威 | 广顺 | 3年 | 辛亥 | 951——953 |
| 显德 | 1月 | 甲寅 | 954 | |
| 世宗柴荣 | 显德 | 6年 | 甲寅 | 954 |
| 恭帝柴宗训 | 显德 | 半年 | 己未 | 959——960 |
宋(960-1279)
【北宋(960-1127)】
| 皇帝 | 年号 | 时长 | 干支日期 | 公元日期(起止) |
| 太祖赵匡胤 | 建隆 | 4年 | 庚申 | 960—963 |
| 乾德 | 6年 | 癸亥 | 963—968 | |
| 开宝 | 9年 | 戊辰 | 968—976 | |
| 太宗赵匡义 | 太平兴国 | 9年 | 丙子 | 976—984 |
| 雍熙 | 4年 | 甲申 | 984—987 | |
| 端拱 | 2年 | 戊子 | 988—989 | |
| 淳化 | 5年 | 戊寅 | 990—994 | |
| 至道 | 3年 | 乙未 | 995—997 | |
| 真宗赵恒 | 咸平 | 6年 | 戊戌 | 998—1003 |
| 景德 | 4年 | 甲辰 | 1004—1007 | |
大中祥符 | 9年 | 戊申 | 1008—1016 | |
| 天禧 | 5年 | 丁巳 | 1017—1021 | |
| 乾兴 | 1年 | 壬戌 | 1022 | |
| 仁宗赵祯 | 天圣 | 10年 | 癸亥 | 1023—1048 |
| 明道 | 2年 | 壬申 | 1048—1033 | |
| 景祐 | 5年 | 甲戌 | 1034—1038 | |
| 宝元 | 3年 | 戊寅 | 1038—1040 | |
| 康定 | 2年 | 庚辰 | 1040—1041 | |
| 庆历 | 8年 | 辛巳 | 1041—1048 | |
| 皇祐 | 6年 | 己丑 | 1049—1054 | |
| 至和 | 3年 | 甲午 | 1054—1056 | |
| 嘉祐 | 8年 | 丙申 | 1056—1063 | |
| 英宗赵曙 | 治平 | 4年 | 甲辰 | 1064—1067 |
| 神宗赵顼 | 熙宁 | 10年 | 戊申 | 1068—1077 |
| 元丰 | 8年 | 戊午 | 1078—1085 | |
| 哲宗赵煦 | 元祐 | 9年 | 丙寅 | 1086—1094 |
| 绍圣 | 5年 | 甲戌 | 1094—1098 | |
| 元符 | 3年 | 戊寅 | 1098—1100 | |
| 徽宗赵佶 | 建中靖国 | 1年 | 辛巳 | 1101 |
| 崇宁 | 5宁 | 壬午 | 1102—1106 | |
| 大观 | 4年 | 丁亥 | 1107—1110 | |
| 政和 | 8年 | 辛卯 | 1111—1118 | |
| 重和 | 2年 | 戊戌 | 1118—1119 | |
| 宣和 | 7年 | 己亥 | 1119—1125 | |
| 钦宗赵桓 | 靖康 | 2年 | 丙午 | 1126—1127 |
【南宋(1127-1279)】
| 皇帝 | 年号 | 时长 | 干支日期 | 公元日期(起止) |
| 高宗赵构 | 建炎 | 4年 | 丁未 | 1127—1130 |
| 绍兴 | 48年 | 辛亥 | 1131—1162 | |
| 孝宗赵昚 | 隆兴 | 2年 | 癸未 | 1163—1164 |
| 乾道 | 9年 | 乙酉 | 1165—1173 | |
| 淳熙 | 16年 | 甲午 | 1174—1189 | |
| 光宗赵惇 | 绍熙 | 5年 | 庚戌 | 1190—1194 |
| 宁宗赵扩 | 庆元 | 6年 | 乙卯 | 1195—1200 |
| 嘉泰 | 4年 | 辛酉 | 1201—1204 | |
| 开禧 | 3年 | 乙丑 | 1205—1207 | |
| 嘉定 | 17年 | 戊辰 | 1208—1224 | |
| 理宗赵昀 | 宝庆 | 3年 | 乙酉 | 1225—1227 |
| 绍定 | 6年 | 戊子 | 1228—1233 | |
| 端平 | 3年 | 甲午 | 1234—1236 | |
| 嘉熙 | 4年 | 丁酉 | 1237—1240 | |
| 淳祐 | 12年 | 辛丑 | 1241—1252 | |
| 宝祐 | 6年 | 癸丑 | 1253—1258 | |
| 开庆 | 1年 | 己未 | 1259 | |
| 景定 | 5年 | 庚申 | 1260—1264 | |
| 度宗赵禥 | 咸淳 | 10年 | 乙丑 | 1265—1274 |
| 法宗赵? | 德祐 | 2年 | 乙亥 | 1275—1276 |
| 端宗赵昰 | 景炎 | 3年 | 丙子 | 1276—1278 |
| 怀宗赵昺 | 祥兴 | 2年 | 戊寅 | 1278—1279 |
【辽(契丹)(907-1025】
| 皇帝 | 年号 | 时长 | 干支日期 | 公元日期(起止) |
| 太祖耶律阿保机 | — | 10年 | 丁卯 | 907—916 |
| 神册 | 7年 | 丙子 | 916—922 | |
| 天赞 | 5年 | 壬午 | 922—926 | |
| 天显 | 1—2 | 丙戌 | 926—927 | |
| 太宗耶律德光 | 天显 | 2—13 | 丁亥 | 927—938 |
| 会同 | 10年 | 戊戌 | 938—947 | |
| 大同 | 1年 | 丁未 | 947 | |
| 世宗耶律阮 | 天禄 | 5年 | 丁未 | 947—951 |
| 穆宗耶律璟 | 应历 | 19年 | 辛亥 | 951—969 |
| 景宗耶律贤 | 保宁 | 11年 | 己巳 | 969—979 |
| 乾亨 | 1—4 | 己卯 | 979—982 | |
| 圣宗耶律隆绪 | 乾亨 | 4—5 | 壬午 | 982—983 |
| 统和 | 30年 | 癸未 | 983—1012 | |
| 开泰 | 10年 | 壬子 | 1012—1021 | |
| 太平 | 11年 | 辛酉 | 1021—1031 | |
| 兴宗耶律宗真 | 景福 | 2年 | 辛未 | 1031—1048 |
| 重熙 | 24年 | 壬申 | 1048—1055 | |
| 道宗耶律洪基 | 清宁 | 10年 | 乙未 | 1055—1064 |
| 咸雍 | 10年 | 乙巳 | 1065—1074 | |
| 大康 | 10年 | 乙卯 | 1075—1084 | |
| 大安 | 10年 | 乙丑 | 1085—1094 | |
| 寿昌 | 7年 | 乙亥 | 1095—1101 | |
| 天祚帝耶律延禧 | 乾统 | 10年 | 辛巳 | 1101—1110 |
| 天庆 | 10年 | 辛卯 | 1111—1120 | |
| 保大 | 5年 | 辛丑 | 1121—1125 |
【金(1125-1234)】
| 皇帝 | 年号 | 时长 | 干支日期 | 公元日期(起止) |
| 太祖完颜阿骨打 | 收国 | 2年 | 乙未 | 1115—1116 |
| 天辅 | 7年 | 丁酉 | 1117—1123 | |
| 太宗完颜晟 | 天会 | 1—13 | 癸卯 | 1123—1135 |
| 熙宗完颜亶 | 天会 | 13—15 | 乙卯 | 1135—1137 |
| 天眷 | 3年 | 戊午 | 1138—1140 | |
| 皇统 | 9年 | 辛酉 | 1141—1149 | |
| 海陵王完颜亮 | 天德 | 5年 | 己巳 | 1149—1153 |
| 贞元 | 4年 | 癸酉 | 1153—1156 | |
| 正隆 | 6年 | 丙子 | 1156—1161 | |
| 世宗完颜雍 | 大定 | 29年 | 辛巳 | 1161—1189 |
| 章宗完颜璟 | 明昌 | 7年 | 庚戌 | 1190—1196 |
| 承安 | 5年 | 丙辰 | 1196—1200 | |
| 泰和 | 8年 | 辛酉 | 1201—1208 | |
| 卫绍王完颜永济 | 大安 | 3年 | 己巳 | 1209—1211 |
| 崇庆 | 2年 | 壬申 | 1212—1213 | |
| 至宁 | 1年 | 癸酉 | 1213 | |
| 宣宗完颜珣 | 贞祐 | 5年 | 癸酉 | 1213—1217 |
| 兴定 | 6年 | 丁丑 | 1217—1222 | |
| 元光 | 2年 | 壬午 | 1222—1223 | |
| 哀宗完颜守绪 | 正大 | 8年 | 甲申 | 1224—1231 |
| 开兴 | 1年 | 壬辰 | 1248 | |
| 天兴 | 3年 | 壬辰 | 1248—1234 |
元(1206-1368)
【大蒙古国(1206-1271)】
| 帝王 | 年号 | 时长 | 干支日期 | 公元日期(起止) |
| 太祖孛儿只斤铁木真 | 无 | 22年 | 丙寅 | 1206—1227 |
| 睿宗孛儿只斤拖雷 | 无 | 1年 | 戊子 | 1228—1229 |
| 太宗孛儿只斤窝阔台 | 无 | 13年 | 己丑 | 1229—1241 |
| (乃马真后) | 无 | 5年 | 壬寅 | 1242—1246 |
| 定宗孛儿只斤贵由 | 无 | 3年 | 丙午 | 1246—1248 |
| (海迷失后) | 无 | 3年 | 己酉 | 1249—1251 |
| 宪宗孛儿只斤蒙哥 | 无 | 9年 | 辛亥 | 1251—1259 |
| 世祖孛儿只斤忽必烈 | 中统 | 5年 | 庚申 | 1260—1264 |
| 至元 | 8年 | 甲子 | 1264—1271 |
【大元(1261-1368)】
| 皇帝 | 年号 | 时长 | 干支日期 | 公元日期(起止) |
| 世祖孛儿只斤忽必烈 | 至元 | 24年 | 辛未 | 1271—1294 |
| 成宗孛儿只斤铁穆耳 | 元贞 | 3年 | 乙未 | 1295—1297 |
| 大德 | 11年 | 丁酉 | 1297—1307 | |
| 武宗孛儿只斤海山 | 至大 | 4年 | 戊申 | 1308—1311 |
| 仁宗孛儿只斤爱育黎拔力八达 | 皇庆 | 2年 | 壬子 | 1312—1313 |
| 延祐 | 7年 | 甲寅 | 1314—1480 | |
| 英宗孛儿只斤硕德八剌 | 至治 | 3年 | 辛酉 | 1481—1483 |
| 泰定帝孛儿只斤也孙铁木儿 | 泰定 | 5年 | 甲子 | 1484—1488 |
| 致和 | 1年 | 戊辰 | 1488 | |
| 天顺帝孛儿只斤阿速吉八 | 天顺 | 1月 | 戊辰 | 1488 |
| 文宗孛儿只斤图帖睦尔 | 天历 | 4月 | 戊辰 | 1488 |
| 明宗孛儿只斤和世瓎 | 天历 | 8月 | 己巳 | 1489 |
| 文宗孛儿只斤图帖睦尔 | 天历 | 9月 | 己巳 | 1489—1330 |
| 至顺 | 2年 | 庚午 | 1330—1348 | |
| 宁宗孛儿只斤懿璘质班 | 至顺 | 1月 | 壬申 | 1348 |
| 惠宗孛儿只斤妥欢帖睦尔 | 至顺 | 5月 | 癸酉 | 1333 |
| 元统 | 3年 | 癸酉 | 1333—1335 | |
| 至元 | 6年 | 乙亥 | 1335—1340 | |
| 至正 | 28年 | 辛巳 | 1341—1368 |
明(1368-1644)
| 皇帝 | 年号 | 时长 | 干支日期 | 公元日期(起止) |
| 太祖朱元璋 | 洪武 | 31年 | 戊申 | 1368—1398 |
| 惠宗朱允炆 | 建文 | 4年 | 己卯 | 1399—1402 |
| 成祖朱棣 | 永乐 | 22年 | 癸巳 | 1403—1424 |
| 仁宗朱高炽 | 洪熙 | 1年 | 乙巳 | 1425—1426 |
| 宣宗朱瞻基 | 宣德 | 10年 | 丙午 | 1426—1435 |
| 英宗朱祁镇 | 正统 | 14年 | 丙辰 | 1436—1449 |
| 代宗朱祁钰 | 景泰 | 8年 | 庚午 | 1450—1457 |
| 英宗朱祁镇 | 天顺 | 8年 | 丁丑 | 1457—1464 |
| 宪宗朱见深 | 成化 | 23年 | 乙酉 | 1465—1487 |
| 孝宗朱祐樘 | 弘治 | 18年 | 戊申 | 1488—1505 |
| 武宗朱厚燳 | 正德 | 16年 | 丙寅 | 1506—1521 |
| 世宗朱厚熜 | 嘉靖 | 45年 | 壬午 | 1522—1566 |
| 穆宗朱载垕 | 隆庆 | 6年 | 丁卯 | 1567—1572 |
| 神宗朱翊钧 | 万历 | 48年 | 癸酉 | 1573—1620 |
| 光宗朱常洛 | 泰昌 | 1年 | 庚申 | 1620 |
| 熹宗朱由校 | 天启 | 7年 | 辛酉 | 1621—1627 |
| 思宗朱由检 | 崇祯 | 17年 | 戊辰 | 1628—1644 |
| 安宗朱由崧 | 弘光 | 1年 | 乙酉 | 1645 |
| 绍宗朱聿键 | 隆武 | 2年 | 乙酉 | 1645—1646 |
| 文宗朱聿鐭 | 绍武 | - | 丙戌 | 1646 |
| 昭宗朱由榔 | 永历 | 37年 | 丁亥 | 1647—1683 |
清(1616-1911)
| 皇帝 | 年号 | 时长 | 干支日期 | 公元日期(起止) |
| 太宗爱新觉罗皇太极 | 崇德 | 8年 | 丙子 | 1636—1643 |
| 世祖爱新觉罗福临 | 顺治 | 18年 | 甲申 | 1644—1661 |
| 圣祖爱新觉罗玄烨 | 康熙 | 61年 | 壬寅 | 1662—1722 |
| 世宗爱新觉罗胤禛 | 雍正 | 13年 | 癸卯 | 1723—1735 |
| 高宗爱新觉罗弘历 | 乾隆 | 60年 | 丙辰 | 1736—1795 |
| 仁宗爱新觉罗顒琰 | 嘉庆 | 25年 | 丙辰 | 1796—1820 |
| 宣宗爱新觉罗旻宁 | 道光 | 30年 | 辛巳 | 1821—1850 |
| 文宗爱新觉罗奕詝 | 咸丰 | 11年 | 辛亥 | 1851—1861 |
| 穆宗爱新觉罗载淳 | 同治 | 13年 | 壬戌 | 1862—1874 |
| 德宗爱新觉罗载湉 | 光绪 | 34年 | 乙亥 | 1875—1908 |
| 废帝爱新觉罗溥仪 | 宣统 | 3年 | 己酉 | 1909—1911 |

吴与弼(1391年—1469年),初名梦祥、长弼,字子傅(一作子传),号康斋,明崇仁县莲塘小陂(今江西省抚州市崇仁县东来乡)人。崇仁学派创立者,明代学者、诗人,著名理学家、教育家。在清代黄宗羲的《明儒学案》一书中,《崇仁学案》位列第一,吴与弼为《崇仁学案》的第一人,显示了吴与弼在明代学术思想界的重要地位。
人物生平
书香门第
吴与弼的先祖吴兢为唐朝汴州人,唐睿宗时为朝廷议大夫。吴兢的七世孙吴宣,迁居抚州。吴与弼的高祖吴景南,擅长诗赋,元代理学大儒吴澄曾为其诗集作序。曾祖吴审,“博学、诗藻清丽”。祖父吴泾,迁居崇仁。父亲吴溥,官到国子监司业,著有《古崖集》。出生于这样的家庭,对吴与弼的教育成长有着重要的影响。
潜心求学
吴与弼六岁入学,七岁学对句,八、九岁在乡学读书时,即已崭露头角,对文学、天文、律历、医卜均有所学。十六岁学诗赋,十八岁习以科举之业。业永乐已丑年,他年方十九,赴京侍奉时任国子监司业的父亲,得拜明代“三杨”之一的冼马杨溥为师。其时,在其父任所获读朱熹所编之《伊洛渊源录》,自谓“睹道统一脉之传”,“于是思自奋励,窃慕向焉,而尽焚当时举子文字,誓必至乎圣贤而后已”。谢绝与人交往,独处小楼二年,专心攻读《四书》、《五经》和洛学(以北宋哲学家、教育家程颢兄弟为首的学派)、闽学(以南宋哲学家、教育家朱熹为首的学派)两个学派的语录,无意进入仕途,决心以讲授理学,传播程、朱哲学思想为己任。
归乡讲学
永乐九年(1411年),吴与弼奉父母之命返乡完婚。在乡里,他一切行动都遵守儒家的礼仪规范。每次到京探望父亲,穿的都是布衣旧鞋。中年以后,家境日贫,他亲自下田耕作,自食其力。对不义之举,一概不为;对不义之财,一概不取。所以,四方求学者络绎不绝,他都谆谆教诲。甚至招待学生食宿,以此远近闻名。其学生胡九韶说:“惟先生遇患难仍能学习、进益,别的人则不免意志颓唐而懒怠下去”。
守义不仕
吴与弼一生不应科举,讲学家乡,屡荐不出。
正统十一年(1446年),由山西佥事何自学荐举入朝,后御史涂谦、抚州知府王宇也一再荐举,他都谢绝不出。
景泰七年(1456年),御史陈述又荐举他入阁讲学,帝下诏江西巡抚韩雍前往礼请,他又辞谢不出。
天顺元年(1457年),大臣石亨与大学士李贤上疏荐举,并派人前往征召吴与弼进京。第二年五月,授为左春坊左谕德,他上疏请辞。英宗召入文华殿,咨询其因,他以“浅陋之学,衰病之躯,有负期待之重,岂敢窃禄为官”力辞。后又多次上疏辞职,并由其子向吏部告以病重,才得以允准。辞官归里后,在呈英宗的谢表中力陈十事,说:“一曰崇圣志,二曰广圣学,三曰隆圣德,四曰子庶民,五曰谨命令,六曰敦教化,七曰清百僚,八曰齐庶政,九曰广言路,十曰君相一德同心。”词语恳切,获明英宗嘉许,派人护送回乡,并命地方官按月支给仓米,以示关怀。
成化五年(1469年),吴与弼病故于家。
学术思想
天道观
“理”,北宋以来理学家所阐明的哲学思想的核心。程朱如此,吴与弼亦如此,他们虽无师承关系,但吴与弼身体力验,潜心研究,在道德修养和认识方法方面,继承和发展了程朱的哲学思想,他认为:“万变之纷纭,而应之各有定理”。就是说,大千世界,万事万物,都有它们自身的规律。他的学生魏庄渠云:“天地万物,血脉相贯”。他主张“存天理,灭人欲”。“穷通、得丧、死生、忧乐,一听于天”。他所指的“天理”,即是自然法则,这不能说不是唯物的。同时,他把“举天地之道”,当以“圣人”、“君子”的准则。曾谓:“未至于天道,未至于圣人,不可谓之成人”。在这里,吴与弼把“天理”,作为一个人道德修养和认识事物的最高标准。主张“天人一理”、“人之所以为人”,是“以其有此理也”。但是,他又认为此“理”,不是所有人的都能领悟的,只有像圣贤那样的人,才能“穷通其道”,这就是“圣人体天”观。一个人出处进退,“惟学圣贤为无弊”,“苟一毫不尽其道,即是自绝于天”。人生处世,“须以天地之量为量,圣人之德为德,方得恰好”。按吴与弼的说法,“圣人”不是高不可攀的神人,而是可以通过学习,修养而达到的。可见,吴与弼对“理”的见解,是符合当时认识规律的。
吴与弼还有一种认识是值得重视的,就是“气”,乃之天也。提出“天之元气”观。他说:“毋以妄想戕真心,客气伤元气”。弟子魏庄渠也认为“天地太和,元气我”。但是,吴与弼把天地元气,归结为“三纲五常”的封建伦理道德,就成为形而上学的唯心观了。“气”,本身是物质的,而不是精神的东西。
性善观
“人性之本善”是吴与弼继承、发展思、孟思想的一个重要方面。觉得“人欲”,有“善恶”、“好坏”之分,但可以“化也”。所谓“化”,就是“使教莹净”,即要教育,要修养,要严以“责己”,使之“心地纯然”。他说:“以责人之心责己,则尽道也”。“凡百皆当责己”,“一毫利心不可萌”。见到他人善、恶的行为,要以其为鉴,反省自己,收敛身心,使自身能够成为“明德”的“新民”。他指出:“明德、新民,虽无二致,然已德未明,邃欲新民,不惟失本末先后之序,岂能有新民之效乎?徒尔劳攘,成私意也”。所谓“新民”,就是有“君子之所养,要令暴慢邪僻之气不设身体”;这样,“收敛为至要”,“责人密,自治疏矣,可不戒哉!”纵使“彼以悭吝狡伪之心待我,吾以正大光明之体待之”。当然,他提出的自我道德修养,仍是以“圣德之言”为准绳的。他说:“吾知圣贤之必可学,而学之必可至”。说明要达到“新民”,必须学习“圣人”,加强自我修养,除去各种欲念,用吴与弼的话来解释就是:“身垢易除,心垢难克。夫心甘情愿虚灵之府,神明之舍,妙古今而贯穹攘,主宰一身,而根据抵万事,本自莹澈照融,何垢之有?然气禀物而耳目口鼻四肢百骸之欲,为垢无穷,不假浣之之协,则神妙不测之体,几何而不化于物哉!”他说的“心垢”,就是身外之物及各种私欲。只有“化”去“心垢”,才能到达“性善”的境界。从这里,我们隐约地可以看到明代早期的理学逐渐向着明代中期王阳明弘扬的心学过渡。这可以说是吴与弼在中国哲学史上的一大奉献。
践行观
古之儒者,崇尚躬行实践。吴与弼完全继承了儒家这一优良传统。他用“理”,来约束自己的行为,规范自己的生活,把封建伦常的“理、”,贯穿到自己日常生活中去。以“理”作为衡量一切、分析一切、判决一切、处理一切,分清是与非、正与反、善与恶、得与失,乃至于忧和乐,生与死的标准,使自己成为理想中的“圣人”、“贤者”。要实现这一目的,“必兢兢于日用常行之间,何者为天理而当存,何者为人欲而当去世,涵泳乎圣贤之言,体察乎圣贤之行”。一个人要达到这一步,在吴与弼看来,就需要“慎独”其心,“居敬”、“穷理”。他说:“人须整理心下”,“不敬则不直,不直便昏昏倒了,万事如此隳,可不惧哉!”所谓“居敬”,就是“言自处以敬”;所谓“穷理”,就是“穷究事物的道理。《周易·说卦》云:“穷理尽性,以至于命”。 如何“居蔽”、“穷理”呢?吴与弼说:“静时涵养,动时省察”。他指的“涵养”,即“含容”,修养,就是“克己复礼”。他认为:“一事少含容,盖一事差,则当痛加克己复礼之功”,“随遇而安之理”,“事往往急便坏了。”吴与弼还把涵养,比作一大关口,说:“凡怨天忧人,皆是此关不透耳”。并指出:“涵养本源功夫,日用间大得”他指的“省察”,就是用封建伦理的“仁义礼智”四端,来体察自己的言行。“约束身心,此为敬也”。指出:“处大事者,须深沈详察”,“所得为者,言忠信,行笃敬”。“日用嘉言圣贤圣嘉言善行沃润之”,强调:“动时工夫尤不易”。黄宗羲在评论吴与弼云:“先生上无所传,而闻道最早,身体力验,只在走趋语默之间,出作入息,刻刻不忘。久之,自成片段……一切玄远之言,绝口不道”。吴与弼晚年赋诗感慨云:“荆棘场中二十年,中间回首实堪怜。欲从何处求心性,日用由来总是天。”
由此可知,吴与弼把“天理”、“居敬”、“践行”,作为自己日常行为的规范,表现出三者一体化的特征,这是他哲学思想体系的一个突出特点。“深悟、静虚、动直”,又是吴与弼一个反思式的认识方法。
苦乐观
吴与弼十九岁时,即弃去求功名利禄的科举业,谢绝交往世俗,潜心于程朱理学,学有所成,“省郡交荐不就”。“寄身于从容无竞之境,游心于恬澹不挠之乡,日以圣贤嘉言善行沃润之”。讲学乡间,躬耕食力,粗衣蔽履,饭粝蔬豆,一生过着清贫生活。晚年,家境窘困,负债累累,贫病交攻,终不失志。明英宗为收人望,三召吴与弼,都称病笃而不出。完成继承了儒家“安贫乐道”的传统遗风。他专攻理学,达到了“物我两忘,惟知有理”的境界。他说:“贫而乐,未易及也”。又说“圣贤之心如此水,或顺或逆,处以理耳,岂以自外至者,为忧乐哉!”吴与弼“力除闲气,固守清贫”。有一夜大雨倾盆而下,“屋漏无干处”,他泰然自怡,隆冬天气,他“彻夜甚寒,腹痛,以夏布帐加覆,略无厌贫之意”。
在“旧催未还,新债又重”,生计至难的情况下,他仍能“素位而行,不必计较”,说:“富贵不淫贫贱乐,男儿到此是豪雄。然此心极,不敢不勉,贫贱能乐,则富贵不淫矣。贫贱富贵,乐而不淫,宜常加警束,古今几人臻斯境也”。吴与弼把“富贵不淫,贫贱而乐”当作鉴别“豪雄”的标尺,可见他面对“至难至危”的困境,表现出多少顽强的精神啊!
天顺年间,吴与弼七十岁了,“贫病交攻,未免心中不宁”,但他“熟思之,须于此处做功夫,教心中泰然。”并“誓虽寒饥死,不敢易初心也”。他乐观的吟诵道:“澹为秋水贫中味,和似春风静后功”,充分表现了吴与弼“穷理”的决心和矢志不渝的坚强信念。
教学成就
吴与弼不仅是明初一位著名的理学家,而且是一位著名的教育家。在中国历史上,他是第一个提出“劳动与读书相结合”的人,其“教育不能脱离生活”的理论,是他教育思想的一个重要内容。吴与弼教学,“本之以小学、四书,持之以躬行实践”,常用程子的话勉励学生说:“当以圣(圣人)为志;言学,当以道(指法则、规律)为志。然进修不可躐等(越级),必先从事于小学,以立其基;然后进乎大学,以极夫体用之全。”要求学生循序渐进,打好基础;不要好高骛远,一步登天。他主张言传身教、因材施教、启发引导、为人师表,把“天理”、“居敬”、“践行”作为自己日常行为的规范。他的教学方法与众不同,和学生一起劳动,一起生活,在劳动中讲学,在劳动中授教,在劳动中悟“道”。他一生讲学乡间,躬耕食力,粗衣蔽履,饭粝蔬豆,将生活性、实践性、道德性融为一体,用“理”来检点日常行为,自我教育,自我反思。他认为“痛省身心,精察物理”,是通向“天道”的阶梯。从其学者数百人,不少学生均成为后来的名人学者,如胡居仁、陈献章、娄谅、胡九韶、车泰、罗伦、谢复、周文、杨杰、饶烈等笃学之士。其弟子后又分成两派,陈献章得其“静观涵养”,遂开白沙学派之宗;胡居仁、娄谅等“得其笃志力行”,遂启余干之学。于此可见其历史影响之大。与弼品德高洁,襟怀坦白,不计个人恩怨,而学识渊博,人称“康斋先生”。
主要著作
吴与弼重求心得,“不事著述”,故其著作不多,主要有语录体之《日录》一卷。今有明末崇祯刻本《康斋文集》12卷。清康熙间将其《日录》汇入《广理学备考》,称《吴先生集》。文章效法欧(欧阳修)苏(苏洵父子),认为古文虽然平易,寓理却很精深。他的诗文大都是积中发外之作,风格清明峻洁,曲折纡余,读了能使人自然兴起。有诗7卷,奏议、书信、杂著1卷,记、序、其它各1卷。其诗不下千首,绝句更具特色,诗文清新流畅,淳实近理。文集收入《四库全书》集部别集类。
历史评价
清人黄宗羲在《明儒学案》中,对他评价说:“康斋倡导小陂,一禀宋人成说。言心,则以知觉而与理为二;言功夫,风静时存养,动时省察。……其相传一派,虽一斋、庄渠稍为转手,始不敢离此矩榘也。白沙出其门,然自叙所得,不关聘君,当为别派。于戏!推轮为大辂之始,增冰为积水所成,微康斋,焉得有后时之盛哉!”在中国历史上,吴与弼第一个提出“劳动与读书相结合”。和学生一起劳动,一起生活,在劳动中讲学,在劳动中授教,在劳动中悟“道”。近代教育家陶行知倡导的“生活教育”,正是源于吴与弼的这一教育思想。同时,吴与弼敢于挑战孔子“君子喻于义,小人喻于利”的重儒轻商思想,提出“素其位而行,不愿乎其外”,推动工农商贾儒学化,并造就了明代以来一大批学士放下身段经商,形成了中国特有的儒商阶层,影响至今。
吴与弼及其所开创的“崇仁之学”,对明代学术思潮的兴起具有“启明”的作用。同时,发生在明代的中国历史上第二次文化下移,是由以王阳明为代表的思想家们推动并完成。而此前,吴与弼发儒学往工农商贾转向之端,推动中国文化教育发生了纵向的传递传播,使儒学由上而下走向社会下层民众,走向工农商贾,意义重大。加之,王阳明的老师又是吴与弼的弟子,由此众多专家学者均认为吴与弼创立的“崇仁之学”是第二次文化下移的发端。